आमेर किला

Short information

  • Location: Devisinghpura, Amer, Jaipur, Rajasthan 302001
  • Timings: 08:00 am to 06:00 pm (Open All days).
  • Best Time to visit : October to March.
  • Entry Fee: For Indian Rs. 10/- per person and for Foreigner Rs 50/-.
  • Children Below 15 yr are free to enter.
  • Sound and Light Show Timings : 7:00 PM onwards and Entry Fee for adult is Rs. 50/- and Rs. 25/- for child.
  • Nearest Airport : Jaipur International Airport at a distance of nearly 23.2 kilometres from Amer fort.
  • Nearest Railway Station: Jaipur Railway Station at a distance of nearly 12.5 kilometres from Amer fort.
  • Built by: Man Singh.
  • Did you know: Sheesh Mahal is one of the most beautiful attractions inside the Amber Fort. Elephant rideand the Maota Lake situated at the base of the fort are probably other major attractions of the fort. This lake was also the source of water for the Rajputs.

अम्बर किला भी आमेर किला के रूप में जाना जाता है। राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध और पर्यटन स्थल में से एक है। जयपुर से पहले आमेर राजस्थान की राजधानी थी। यह एक पुराना किला है जिसे राजा मान सिंह सन 1592 द्वारा बनाया गया था। बाद में, मान सिंह ने किले के आसपास के क्षेत्र को शासन करना शुरू कर दिया था जिसे आमेर राज्य कहा जाता था। अम्बर किला जयपुर शहर से 11 किमी दूरी पर स्थित है। आमेर किला लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर में बनाया गया था और माओथा झील पूरे किले के लिए एक विशेष आकर्षण को जोड़ता है। किले की वास्तुकला ने हिंदू और मुस्लिम दोनों के वर्गो को प्रभावित किया है। इस किले में ‘शीला देवी’ मंदिर है और ‘गणेश पोल’ जो एक द्वार है जो राजाओं के निजी महलों और ‘दीवान-ए-आम’, ‘शीश महल’ और यहां तक कि ‘सुख महल’ की ओर जाता है। शीला माता कच्छवाहा राजपूत रॉयल्स का परिवार कुल देवी है। ऐसा माना जाता है कि देवी की मूर्ति काले पत्थर से बनी है जो पूर्वी बंगाल से आयात की गई थी।

किले को पूरा करने में 100 साल लग गए थे। शीश महल अम्बर किले के अंदर सबसे सुंदर आकर्षणों में से एक है। शीश महल (मिरर पैलेस), जिसे जय मंदिर कहा जाता है, भारत में सबसे खूबसूरत दर्पण महलों में से एक है। हाथी की सवारी और किले के आधार पर स्थित मोटो झील इस किला के अन्य प्रमुख आकर्षण हैं। यह झील राजपूतों के लिए भी पानी का स्रोत था।

लोककथाओं के अनुसार, यह माना जाता है कि किला का नाम अम्बा माता के नाम पर रखा गया था, जो देवी दुर्गा का एक रूप है, यह देवी इस क्षेत्र में रहने वाले मीनाओं के कुल देवी  थी। एक समय पर, आमेर पर एक छोटा समुदाय जिस समुदाय का नाम मीना था और इस क्षेत्र पर राज्ये करते थे। तब इस क्षेत्र को खोगोंग नाम से जाना जाता था। बाद में इसे कच्छवाह (एक राजपूत कबीला) द्वारा आक्रमण कर दिया गया, जिन्होंने इसे अपना राज्य बनाया। इस प्रकार, यह कच्छवाहा राजपूत वंश की एक नई राजधानी बन गई और इस क्षेत्र को नया नाम आमेर (अम्बर) मिला।

किले तक पहुंचने के लिए दो तरीके है एक हाथी की सवारी द्वारा और दूसरा पैदल चल कर।  इस किले में चार वर्ग हैं, प्रत्येक परिसर एक दूसरे के साथ है। सूरजपोल (मुख्य द्वार), जलेबचैक (मुख्य आंगन) की ओर जाता है, जलेबचौक महल की ओर जाता है और फिर सिलादेवी मंदिर की ओर जाता है। द्वितीय आंगन में दीवान-ए-आम या सार्वजनिक दर्शकों का हॉल शामिल है एक बड़ा हॉल जो स्तंभों की दो पंक्तियों के समर्थन खडा है। हॉल तीनों तरफ खुला है। तीसरा आंगन में दो शानदार इमारतों को रखा गया है। बाएं पर, जय मंदिर स्थित है जो बहुत सुंदर है। जय मंदिर के सामने का भवन को सुखमहल (आनंद का भवन) कहा जाता है। यह जगह शाही परिवार द्वारा एकान्त समय व आराम करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। महल की शाही महिलाएं महल और उनकी सेविकायें चैथे आंगन में रहती थी, जिसे जनान के रूप में जाना जाता है।

राजस्थान में पांच अन्य किलों के साथ आमेर किले को वर्ष 2013 में ‘राजस्थान के पहाड़ी फोर्ट’ के तहत यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। यह किला सुबह 8 से शाम 6 बजे आंगतुको के लिए खुला रहता है और श्याम 7.00 बजे से 9.00 बजे तक लाइट शो प्रदर्शन किया जाता है।

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मानचित्र में आमेर किला

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