केदारनाथ मंदिर

Short information

  • Location: Kedarnath, Uttarakhand 246445.
  • Temple Opening Date in 2019:  The kapat of Shri Kedarnath Temple will open on 10th May 2019 at 4:15 AM.
  • Kedarnath Temple closing date 2019: 29 Oct 2019 (tentative)
  • Open and Close Timings:
    • Kedarnath Temple opens at 7.00 am for general visitors.
    •  There is a special prayer from 1.00 pm to 2.00 pm and then closed to recreate the temple.
    • Again at 5 pm in evening the temple is opened for the public.
    • The statue of Lord Shiva with five facesduly makeup and a regular aartiis done from 7.30 am till 8.30 am.
    • At 8.30 pm Kedareshwar revered temple is closed.
    • Kedar valley is covered with snow in winter. Although the opening and closing moment of Kedarnath Temple is extracted, but it usually closes on the first day of Kartik (Oct-Nov) and reopens in Vaishakh (Apr-May) every year.
    • During its closure the shrine is submerged in snow and worship is performed at Ukhimath.
  • Nearest Airport : Jolly Grant airport of Dehradun at a distance of nearly 250 kilometres from Kedarnath.

  • Nearest Railway Station: Rishikesh railway station at a distance of nearly 221 kilometres from Kedarnath.

केदारनाथ मंदिर हिन्दुओं के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर 12 ज्योतिलिंगों में से एक है तथा चार धाम और पंच केदार में भी इस मंदिर का नाम सम्मिलित है। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। केदारनाथ मंदिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग जिल में स्थित है तथा उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है।

यह मन्दिर एक छह फीट ऊँचे चैकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मण्डप और गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ है। बाहर प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय और इसका जीर्णोद्धार आदि गुरु शंकराचार्य ने किया था।

केदारनाथ मंदिर की भक्तों में बड़ी मान्यता है। उत्तराखण्ड में बद्रीनाथ और केदारनाथ-ये दो प्रधान तीर्थ हैं, दोनो के दर्शनों का बड़ा ही माहात्म्य है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है और केदारनापथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश पूर्वक जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है।

ऐसा माना जात है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया। यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित हैं।

एक कथा के अनुसार इस मंदिर को पंचकेदार इसलिए माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवो अपने पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर का आर्शीवाद चाहते थे। पांडवो भगवान शंकर को खोजते हुए केदारनाथ पहुँच गए जहां भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर रखा था। पांडवो ने भगवान शंकर को खोज कर उनसे आर्शीवाद प्राप्त किया था। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है।

जून 2013 के दौरान भारत के उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। अचानक आई बाढ़ से मंदिर को काफी नुकसान हुआ था। ऐतिहासिक मन्दिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहा।

  • केदारनाथ जी का मन्दिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रातः 7.00 बजे खुलता है।
  • दोपहर 1.00 से 2.00 बजे तक विशेष पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मन्दिर बन्द कर दिया जाता है।
  • पुनः शाम 5 बजे जनता के दर्शन हेतु मन्दिर खोला जाता है।
  • पाँच मुख वाली भगवान शिव की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7.30 बजे से 8.30 बजे तक नियमित आरती होती है।
  • रात्रि 8.30 बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मन्दिर बन्द कर दिया जाता है।
  • शीतकाल में केदारघाटी बर्फ से ढँक जाती है। यद्यपि केदारनाथ-मन्दिर के खोलने और बन्द करने का मुहूर्त निकाला जाता है, किन्तु यह सामान्यतः नवम्बर माह की 15 तारीख से पूर्व (वृश्चिक संक्रान्ति से दो दिन पूर्व) बन्द हो जाता है और छरू माह बाद अर्थात वैशाखी (13-14 अप्रैल) के बाद कपाट खुलता है।
  • ऐसी स्थिति में केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ‘उखीमठ’ में लाया जाता हैं।

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केदारनाथ मंदिर फोटो गैलरी

मानचित्र में केदारनाथ मंदिर

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