काली बरी मंदिर

Short information

  • Location: Mandir Marg, Pocket H, Type 2, President's Estate, New Delhi, Delhi 110001
  • Temple Open and Close Timing:
  •  Summer - 04:30 am to 12:00 pm and 04:00 pm to 09:00 pm
  •  Winter - 05:00 am to 01:00 pm and 04:30 pm to 09:00 pm
  • In special days visiting times can be changed.
  • Nearest Metro Station: Rama Krishna Ashram Metro Station at a distance of nearly 2.9 kilometres from Kali Bari Temple.
  • Nearest Airport: Indira Gandhi International Airport at a distance of nearly 16.7 kilometres from Kali Bari Temple.
  • Nearest Railway Station: New Delhi Railway Station at a distance of nearly 5.5 kilometres from Kali Bari Temple.
  • Important festival: Durga Puja.
  • Primary deity: Goddess Kali.

काली बरी मंदिर एक हिन्दू मंदिर है विशेष कर बंगाली समुदाय के लिए। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है जो मंदिर मार्ग, नई दिल्ली व भारत के राजधानी दिल्ली में स्थिति है। यह मंदिर लक्ष्मीनारायण मंदिर के बहुत नजदीक स्थिति है। इस मंदिर का स्थापना 1930 में की गई थी।

देवी काली का यह एक छोटा सा मंदिर है इस मंदिर में देवी काली की मूर्ति को कोलकाता के कालिघत काली मंदिर की प्रतिमा जैसी बनाई गई है। मंदिर की समिति को 1935 में प्रथम राष्ट्रपति के रूप में सुभाष चंद्र बोस ने औपचारिक रूप दिया था, और प्रथम मंदिर भवन का उद्घाटन सर जस्टिस मनमाथा नाथ मुखर्जी ने किया था। इसके बाद प्राधिकरण ने आगंतुकों और अतिथि के लिए एक इमारत की स्थापना की। बंगाली पर्यटकों को यहां रहने के लिए कमरे या छात्रावास की सुविधा भी प्रदान की जाती हैं। दिल्ली कालीबरी में एक पुरानी और समृद्ध पुस्तकालय है।

कालीबारी में मनाया जाने वाला दुर्गा पूजा का उत्सव, दिल्ली शहर में सबसे पुरानी दुर्गा पूजोंओं में से एक है। यह पहली बार दुर्गा पूजा 1925 में कि गई थी। काली बारी का मूल मंदिर बैरार्ड रोड (आज की बांग्ला साहिब रोड) पर स्थित था, जहां स्थानीय बंगाली समुदाय वार्षिक दुर्गा पूजा के लिए इकट्ठा हुआ करते थे। 1931 के बाद किसी कारण वश इस मंदिर को वर्तमान मंदिर की जहां स्थानांतरित किया गया था। जो आज यह दिल्ली में सैकड़ों पूजा समितियों के लिए नोडल बिंदु बना हुआ है, और दिल्ली के बंगालियों में व्यापक रूप से सम्मानित है। दिल्ली में दुर्गा पूजा 1910 कश्मीरी गेट पर शुरू हुई थी जो दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित की गई थी। तिमारपुर में दुर्गा पूजा तिमारपुर और सिविल लाईस में दुर्गा पूजा सिविल लाइंस पूजा समिति द्वारा 1914 आयोजित की गई थी।
काली बारी में दुर्गा पूजा उत्सव आज भी परंपरागत शैली द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें परंपरागत एकचालदार ठाकुर (मूर्तियों के लिए एक फ्रेम) और शिलाल काज शामिल हैं। यहां तक कि पूजा अनुष्ठान में 1936 से आज तक कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। पारंपरिक प्रतियोगिताओं रवींद्र संगीत और पाठ भी अभी भी आयोतिज किया जाते हैं। कारीगरों को पूजा मंडल बनाने के लिए कोलकाता से लाया जाता है।

काली बारी मंदिर विशेष रूप से दुर्गा पूजा के त्योहार के दौरान जाना चाहिए जो हर साल अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान आयोजित किया जाता है। दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान, मंदिर में एक अध्यात्मिक उत्साह के केंद्र में परिवर्तित हो जाता है और भक्तिपूर्ण प्रार्थनाओं और रंगीन उत्सवों के साथ मंदिर का वातावरण भव्य हो जाता है। मंदिर के आधार में एक विशाल पीपल का पेड़ है, जिसे सभी भक्तों द्वारा बहुत ही पवित्र माना जाता है। भक्त अक्सर लोगों के पेड़ की तने के चारों ओर एक लाल धागा बांधा जाता है और भक्त अपनी इच्छा की पूर्ति करने के लिए बांधते हैं और जब भक्त की इच्छा की पूर्ति हो जाती है तो बाद में लाल धागा खोला जाता है।

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