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कात्यायनी देवी मंदिर एक हिन्दू मंदिर है जो कि भारत के राज्य उत्तर प्रदेश, जिला मथुरा क भूतेश्वर में स्थित है। यह मंदिर माता कात्यायनी को समर्पित है तथा इस मंदिर का नाम प्राचीन सिद्धपीठ में आता है। यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में शक्ति को देवी कात्यायनी के रूप पूजा जाता है और भैरव को भूतेश के रूप में पूजा जाता है।
भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा भूमि श्रीधाम वृन्दावन में भगवती देवी के केश गिरे थे, इसका प्रमाण का विवरण सभी शास्त्रों में मिलता है। आर्यशास्त्र, ब्रह्म वैवर्त पुराण एवं आद्या स्तोत्र में इस स्थान का उल्लेख किया गया है। ‘व्रजे कात्यायनी परा’ अर्थात् वृन्दावन में स्थित शक्तिपीठ में ब्रह्मशक्ति महामाया श्री माता कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध है।
देवर्षि श्री वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के बाईसवें अध्याय में उल्लेख किया है-
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः।।
हे कात्यायनि! हे महामाये! हे महायोगिनि! हे अधीश्वरि! हे देवि!
पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माण चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती के केश (बाल) इस स्थान पर गिरे थे।
किरीतेस्वरी मंदिर में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर दुर्गा पूजा व नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिर को फूलो व लाईट से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।